चोरों की नगरी में, चोरी का मुकदमा
इन्साफ में थोड़ी, तो चोरी लाज़मी है ,
वो चोर ज़मीर के, मेरा मुल्क खा गए,
उनपर मुकदमा, तो होना लाज़मी है,
चोरों की नगरी में, इमानदार मैं निकला,
अपनों का रूठना, तो थोडा लाज़मी है-
मयंक
इन्साफ में थोड़ी, तो चोरी लाज़मी है ,
वो चोर ज़मीर के, मेरा मुल्क खा गए,
उनपर मुकदमा, तो होना लाज़मी है,
चोरों की नगरी में, इमानदार मैं निकला,
अपनों का रूठना, तो थोडा लाज़मी है-
मयंक